काये के मानों माता समान...कविता-
ग्राम-राजापुर, पोस्ट-लडवारी, जिला-निवाड़ी (मध्यप्रदेश) से मनोज कुशवाहा एक कविता सुना रहे हैं :
काये के मानों माता समान-
उसी का करलो तुम सम्मान-
उसी का करलो तुम सम्मान-
माता बना देते पहले बान-
अमृत देते है वोह वरदान-
दूध होता होता है अमृत जैसा...
Posted on: Nov 04, 2019. Tags: MANOJ KUSHWAHA MP NIWADI POEM SONG VICTIMS REGISTER
मोला निक लागे रानी हिली झूली रेगना हर तोर...कर्मा गीत-
ग्राम-कोटया, थाना-प्रतापपुर, जिला-सरगुजा (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक गीत सुना रहे हैं :
मोला निक लागे रानी हिली झूली रेगना हर तोर-
हिली झूली रेगना हर तोर पातर-पातर कनिहा हर तोर-
मोला निक लागे रानी लाली लाली लुगरा हर तोर-
मोला निक लागे रानी पातर-पातर कनिहा हर तोर-
मोला निक लागे रानी हिली झूली रेगना हर तोर...
Posted on: Nov 04, 2019. Tags: CG MEWALAL DEVANGAN SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
जय अम्बे जगदंबे जय शेरा वाली...गीत-
ग्राम-बटई, पोस्ट-रेवटी, विकासखण्ड-प्रतापपुर, जिला-सूरजपुर (छत्तीसगढ़) से दुर्गेश पटेल एक गीत सुना रहे हैं :
जय अम्बे जगदंबे जय शेरा वाली-
तोर कृपा से तोर दया भर ला सबका झोली-
ओ माँ भर ला सबका झोली-
जय अम्बे जगदंबे जय शेरा वाली-
तोर कृपया से तोर दया भर ला सबका झोली-
ओ माँ भर ला सबका झोली-
जय अम्बे जगदंबे जय शेरा वाली...
Posted on: Nov 04, 2019. Tags: CG DURGEHSH PATEL SONG SURAJPUR VICTIMS REGISTER
छत्तीसगढ़ी गीत : मैं तो जिया थव मैं जोड़ी मोर तोरे निका धीर...
ग्राम-कोट्या, ब्लाक-प्रतापपुर, जिला-सुरजपुर (छत्तीसगढ़) से मेवालाल देवांगन एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहें है:
मैं तो जिया थव मैं जोड़ी मोर तोरे निका धीर-
मैं जिया थव बैहा मोर तोरे निका धीर-
दिया बिना बाती कैसे पानी बिना मिना हो-
मै जियत थो जोड़ी मोर निका धीर...
Posted on: Nov 03, 2019. Tags: MEWALAL DEVANGAN SONG SURAJPUR CG VICTIMS REGISTER
पारंपरिक जैविक खेती के बारे में जानकारी दे रहे है, जिला (छत्तीसगढ़) से....
ग्राम-केकराखोली, ब्लाक-मगरलोड, जिला धमतरी (छत्तीसगढ़) से मोहन यादव उनके साथ है ग्राम-घोटियादादर ने निवासी नक्क्षेना राम कश्यप बता रहा है आज भी हम लोग ज्यों-ज्यों विकास की ओर अग्रसर हो रहे हैं, वैसे-वैसे हम अपनी संस्कृति और परंपराओं को पीछे छोड़ते जा रहे हैं परन्तु अपने जीवनकाल में अपनी खेत में रासायनिक खाद्य का प्रयोग नही करते है, जैविक खाद्य घरेलु निर्मित खाद्य तैयार कर प्रयोग किया जाता है जिनका नाम है “हंडी खाद्य” जिसे घर में ही निर्माण किया जाता है. इस खाद्य को 1 एकड़ के लिए तैयार करने के लिए.
1बड़ा सा मटका या फिर ड्रम ले. और 10 किलो. गोबर, 10 किलो. मूत्र, 1 किलो. 1 बेसन किलो. इन सब घोल बनाये और उसे लगातार डंडे के सहायता से घुमाते रहे 5-7 दिनों तक रखें उसके बाद खेत में छिड़काव करे. जिसे जमीन की नमी बनी रहती है और बराबर मात्रा में उपजाऊ बना रहता है.इस सन्देश के माध्यम से बताया पारंपरिक जैविक खेती के शुरू करे.
